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लखनऊ सहारा शहर विवाद: सपना रॉय को निजी सामान निकालने के लिए करनी पड़ी लंबी जद्दोजहद, निगम अधिकारियों से हुई तीखी नोकझोंक

वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्ट

लखनऊ। गोमतीनगर स्थित 170 एकड़ में फैले सहारा शहर को नगर निगम द्वारा अपने नियंत्रण में लिए जाने के बाद शनिवार को एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। सहारा समूह के संस्थापक स्वर्गीय सुब्रत रॉय सहारा की पत्नी सपना रॉय अपने निजी सामान को घर से निकालने पहुंचीं, लेकिन उन्हें इस प्रक्रिया के दौरान काफी संघर्ष और प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। निगम अधिकारियों की अनदेखी, शुरुआती असहमति और प्रशासनिक सख्ती के बीच अंततः उन्हें सीमित समय के लिए अंदर जाने की अनुमति मिल सकी।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

नगर निगम ने अक्टूबर 2025 में सहारा शहर को अपने कब्जे में लेने की आधिकारिक कार्रवाई की थी। जानकारी के मुताबिक:

वर्ष 1995 में यह भूमि सहारा समूह को लीज पर दी गई थी।

निगम के अनुसार, सहारा समूह लीज की मूल शर्तों का पालन करने में विफल रहा।

कई बार दिए गए नोटिसों के बाद नगर निगम ने लीज निरस्त कर पूरी संपत्ति को अपने नियंत्रण में ले लिया।

निगम ने परिसर में रह रहे लोगों को घर खाली करने और निजी सामान हटाने के लिए निर्देश जारी किए थे। कई लोग निर्देशानुसार निकल गए, लेकिन सपना रॉय उस समय अपना सामान नहीं निकाल सकीं, जिसके चलते मामला और जटिल हो गया।

अनुमति के लिए सप्ताहभर की कवायद

करीब एक सप्ताह पहले सपना रॉय ने नगर निगम से बच्चों की किताबें, दस्तावेज और अन्य निजी सामान हटाने के लिए अनुमति मांगी थी। लेकिन जवाब मिलने में देरी होती रही। शनिवार को जब वह स्वयं इस मामले को आगे बढ़ाने पहुंचीं, तो उन्हें अधिकारियों से असहयोग का सामना करना पड़ा।

सूत्रों के अनुसार:

अधिकारियों ने शुरू में किसी भी प्रकार की अनुमति देने से इनकार किया।

सपना रॉय और निगम अधिकारियों के बीच काफी बहस हुई।

उच्च स्तर पर की गई सिफारिशों के बाद मामला आगे बढ़ा।

आख़िरकार एक शपथपत्र (Affidavit) देने की शर्त पर उन्हें सीमित समय के लिए घर में प्रवेश की अनुमति दी गई। शपथपत्र में यह स्पष्ट करने को कहा गया कि वह केवल निजी सामान ही निकालेंगी और कोई संरचनात्मक बदलाव या रिकॉर्ड हटाने का प्रयास नहीं करेंगी।

सामान निकालते समय भी तनावपूर्ण माहौल

सपना रॉय जब अपनी टीम के साथ घर पहुंचीं, तो नगर निगम की टीम पहले से मौजूद थी। इसी बीच सामान निकालने को लेकर:

सपना रॉय और अधिकारियों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई।

निगम टीम ने हर सामान की निगरानी की।

प्रक्रिया समयबद्ध और नियंत्रित रखी गई।

नगर निगम के संपत्ति प्रभारी रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि शनिवार को सपना रॉय को सीमित समय के लिए प्रवेश दिया गया था और उनकी टीम ने कार्रवाई की निगरानी करते हुए उन्हें आवश्यक सामग्री बाहर निकालने की अनुमति दी।

सहारा शहर की वर्तमान स्थिति

निगम के कब्जे के बाद सहारा शहर में:

विभिन्न इमारतों और बंगले सील कर दिए गए हैं।

सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि कोई अनधिकृत प्रवेश न हो।

संपत्ति का रिकॉर्ड नगरपालिका प्रशासन के पास सुरक्षित रखा गया है।

सहारा समूह पहले से ही कई वित्तीय और कानूनी जांचों का सामना कर रहा है। नगर निगम की इस कार्रवाई को सहारा साम्राज्य पर एक और बड़ी प्रशासनिक चोट के रूप में देखा जा रहा है।

स्थानीय निवासियों में चिंता

निगम की कठोर कार्रवाई और अचानक कब्जे से सहारा शहर में पहले रह चुके सैकड़ों परिवारों में असमंजस बना हुआ है। कई परिवारों का कहना है कि—

संपत्ति विवाद का असर उन पर पड़ रहा है जो सिर्फ किरायेदार थे।

व्यक्तिगत सामान और दस्तावेज़ निकालने की प्रक्रिया कठिन बना दी गई है।

अगले कदम क्या?

नगर निगम सहारा शहर की लीज निरस्तीकरण प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत करने में जुटा है और परिसर के पुनर्विकास या उपयोग को लेकर आगे की योजना तैयार कर रहा है। वहीं सहारा समूह की ओर से कानूनी चुनौती दिए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।

Jitendra Maurya

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